मंदिर में मैं कुरान पढ़ाता चला गया।
गीता में ही खुदा को मैं पाता चला गया।
हैं रूह हम सभी, ये सिखाता चला गया।
मैं ज़िन्दगी का जश्न मनाता चला गया।
बचपन से जो खली थी कमी प्यार की मुझे..
औरों को फ़िर गले मैं लगाता चला गया।
मैं ज़िन्दगी में प्यार लुटाता चला गया।
दिल से मैं नफ़रतों को मिटाता चला गया।
जब रब को खोजने में यहाँ खोये थे सभी।
मैं रब को अपने दिल में ही पाता चला गया।
हिन्दू में,मुस्लिमों में, वतन बट रहा था जब।
रसखान बन मैं कृष्ण को गाता चला गया।
दीवाली में अली मिले, रमज़ान में हैं राम,
है रब तो एक, नूर, ये गाता चला गया।