हर ख्वाइशों को जैसे अपना एक मुकाम मिल गया, बरसो से तड़पते हुए इन लबो को, तेरे लबो का बहाना मिल गया, दुआ तो मांगी थी बस तुझे जी भर के देखने की, जाने क्या रेहमत हुई खुदा की, हमें तेरी बाँहों का सहारा मिल गया