ज़िंदगानी के चारों पहियों को साथ चलते हुए देखा है? क़ाफ़िले में राहगीर बहुत हैं , पर साथी मिलते हुए देखा है? रोज़ निकल पड़ती हो मेरी फ़िराक़ में इस दुनिया के मेले में क्या कभी मुस्कुराकर आइने में अपनी आँखों की गहराइयों में देखा है?