‌मंजिलों की परवाह करेंगे किसी और रोज़

अभी इन रास्तों की फ़िक्र जरूरी है!


न सुने वो चाहे कभी लफ्ज़ हमारे.. मगर

होना इन ज़ख्मों का जिक्र जरूरी है!


तरक्की.. पैसा.. प्यार... अरे छोड़ो

यहां रहना भी थोड़ा बेफिक्र जरूरी है!