आंखों में कुछ नमी सी है,
कुछ ठहर सा गया है,
इन सांसों में!
सांझ होते ही इस मन ने,
एक बार फिर...
ओढ़ ली है, यादों की चादर!
और निकल पड़ा है,
उसी पुराने सफर पर!
नींद गायब है...
जैसे कोई समझौता किया हो,
इस रात से!
एक अजीब सा शोर है,
दिल की इस ख़ामोशी में।
सब कुछ होकर भी,
कुछ कमी सी है...
आंखों में कुछ नमी सी है!!


