मैं नहीं डरता ज़माने से

जो जी में आए कर जाने से

पर जिस रोज मेरी उंगली

छूटी थी उनके हाथों से

जमाने की हर चीज 

डराती थी 

मुझे कमजोर

बताती थी

पर उनके होने का अहसास

मेरी हिम्मत बन बैठा

मैं फिर एक बार 

जमाने से तन बैठा

उनका होना 

मेरी हिम्मत है

मेरी सारी हिम्मत हैं

मेरे पापा

Devendra Yadav