एक ज़माना था—

बुखार आने पर

रात भर सिरहाने बैठना,

ठंडी पट्टियाँ बदलना,

काढ़ा उबालना,

हाथ थामे रखना—

सेवा थी।

अब—

अस्पताल में रख देना,

बिल चुका देना,

इमोजी भेज देना,

“Get Well Soon” लिख देना,

ऑनलाइन दवा भिजवा देना—

यही सेवा है।

बीमार को भी

अनुगृहित होना पड़ता है।