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साँझ हो गई


साँझ हो गई।अभी तक अकेला हूँ Iचूजे नेगर्दन लंबी की।कहाँ तक करतामगर की Iझाँका।कहाँ तक देखता!मगर देखा।

देवेन्द्र पंत

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