Poetry 1 min read 585.6K reads

शे'र


तुम्हारा प्रण है जिस सत्ता की खातिरउसी पर काल अब मंडरा रहा है।

पितामह वक़्त रहते तोड़ दो प्रण ,सुयोधन सर पे चढ़ता जा रहा है।

देवेन्द्र दीक्षित

Read more Earn more Learn more