कहने से दुःख कम होता है माना परकिससे कहना है यह कैसे जानू मैं!सबसे गहरे ज़ख्म उसी से मिलते हैं,जिसको थोड़ा सा भी अपना मानू मैं।
कहने से दुःख कम होता है माना परकिससे कहना है यह कैसे जानू मैं!
सबसे गहरे ज़ख्म उसी से मिलते हैं,जिसको थोड़ा सा भी अपना मानू मैं।