किसी नेक दिल को नहीं तोड़ियेगा ,
नहीं तो लगेगा तुम्हें श्राप रब का,
बिखर जायेगी सारी दुनिया तुम्हारी
खुशियाँ न चौखट चढ़ेंगी तुम्हारी
लबों पर उदासी का पहरा लगेगा
ग़मों का तेरे सिर पे सहरा बंधेगा,
तू भागेगा मन्दिर मज़ारों शिवाला
पीना पड़ेगा तुझे ग़म का प्याला।
कहीं से भी तुझको न आराम होगा,
जीना भी तुम्हारा हराम होगा ।
उजड़ेंगी रातों की नींदे ये तेरे ,
लाएँगे दुःख रोज तेरे सबेरे।
किसी रोज सोचेगा मर जाऊ लेकिन,
तुझे मौत मिलने में भी देर होगी।
इसी वास्ते कह रहा हूँ मैं तुझसे
मेरी बात पर गौर फरमाइएगा
किसी नेक दिल को नहीं तोड़ियेगा
- Devendra Dixit