Poetry 1 min read 576.3K reads

मुक्तक


कितने ही एहसास हृदय में दबे रह गए अन्दर,सारी खुशियाँ उड़ा ले गया पल में एक बवंडर ।

मन की धरती जो पहले फल-फूली हरी-भरी थी,उसका रखवाला ही उसको बना गया अब बंजर।

— Devendra Babu
Read more Earn more Learn more