कितने ही एहसास हृदय में दबे रह गए अन्दर,सारी खुशियाँ उड़ा ले गया पल में एक बवंडर ।मन की धरती जो पहले फल-फूली हरी-भरी थी,उसका रखवाला ही उसको बना गया अब बंजर।
कितने ही एहसास हृदय में दबे रह गए अन्दर,सारी खुशियाँ उड़ा ले गया पल में एक बवंडर ।
मन की धरती जो पहले फल-फूली हरी-भरी थी,उसका रखवाला ही उसको बना गया अब बंजर।