था जो नीरस उसे मन लुभावन कियामेरे पतझड़ से जीवन को सावन किया।तुम हो गंगा सी अविराम अविरल प्रियेमैं अपावन जिसे तुमने पावन किया,
था जो नीरस उसे मन लुभावन कियामेरे पतझड़ से जीवन को सावन किया।
तुम हो गंगा सी अविराम अविरल प्रियेमैं अपावन जिसे तुमने पावन किया,