आ गया नववर्ष संवत्सर हमारा,
हो रहा भगवा मयी संसार सारा।
चैत्र का पावन महीना शुक्लपक्षी प्रतिपदा है ,
खेत में चहुओर फैली स्वर्णरंगी संपदा है।
खुश बहुत है देख हलधर ये नज़ारा
आ गया नव वर्ष संवत्सर हमारा।
अखिल जग में काल गणना के पुरातन स्रोत हम हैं ।
जो तिमिर हर ले जगत का वेद का वह द्योत हम हैं।
हमसे ही था यह प्रकाशित विश्व सारा।
आ गया नव वर्ष संवत्सर हमारा।
योग का भी ज्ञान दुनिया को हमी ने ही दिया है,
जटिल रोगों से जगत को मुक्त भी हमने किया है।
विषमता में बन रहे हम ही सहारा ,
आ गया नववर्ष संवत्सर हमारा।
निज संस्कृति निज देश भारत वर्ष पर है गर्व हमको ,
सभ्यता का संचरण कर है मनाना पर्व हमको ।
ज्ञान का हो जागरण जन में दुबारा ।
आ गया नववर्ष संवत्सर हमारा।
Devendra babu
