नहीं मुझसे ये देखा जा रहा है,
किसी का दर्द बढ़ता जा रहा है।

बुलाकर लाओ चारागर को कोई
ज़खम नासूर बनता जा रहा है ।

तुम्हारा प्रण है जिस सत्ता की खातिर
उसी पर काल अब मंडरा रहा है।

पितामह वक़्त रहते तोड़ दो प्रण
सुयोधन सर पे चढ़ता जा रहा है।

अगर तुम टाल पाना टाल लेना
समय कुचक्र रचने जा रहा है।

छुपाया तुमने क्यों था भेद कुंती ,
तुम्हारा कर्ण मरने जा रहा है

सुनो राजन तुम्हारी भूल का फल
तुम्हारा पुत्र चखने जा रहा है।

हुआ अपमान जिसका कुरु सभा में
महाभारत वो लेकर आ रहा है ।
- Devendra babu