कहने को देखो खुशियों की आयी है दीवाली,
लेकीन रज्जो के चौके का हर डब्बा है खाली।

रज्जो का दूल्हा बाजार
गया था करने काम,
लेकिन उसको त्योहारी पर
मिले न पूरे दाम ।

बड़ी दुकानें लूट रहीं हैं फिर अबकी दीवाली,
कहने को देखो खुशियों की आयी है दीवाली,

कृत्रिम दीपक बिके जा रहे
महंगे जिनके दाम ।
सत्तू देख देख कर यह सब
बेहद है हैरान ।

कहाँ किसी को भाती हैं अब मिट्टी की दीयाली ।
कहने को देखो खुशियों की आयी है दीवाली।

समझ नहीं आता सत्तू को
कैसे घर जायेगा !
बच्चों के ख़ातिर फुलझड़ियां
कैसे ले पाएगा।

चाइनीज झालर के आगे बिकी न एक दीयाली
कहने को देखो खुशियों की आयी है दीवाली।
देवेन्द्र दीक्षित
@idevevendrababu

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