तुम्हारी औकात क्या है ?


सदिया बीती,

समय की गति न बदली

नियत आदमी की न बदली

हालत गरीब की न बदली

सत्ता से जिसने दोस्ती कर ली

रफ़्तार जीने की पकड़ ली

जो आया रास्ते में कोई गरीब

गर्दन उसकी पकड़ ली

भोंहे रॉब से तान ली

मुंह से अविरल बात निकली


तुम्हारी औकात क्या है ?