सब्र कर कुछ और खेल लेने दे उसे,

कोई कहानी ही देगा दे लेने दे उसे।


जानता है तूं भी मैं भी ये दिल छिपा है ,

दिल में फरेब कितना, छुपा लेने दे उसे।


बात दोस्ती से शुरू की थी उसने यूँ तो,

बैठ कर बाते करने से डरता है, डर लेने दे उसे।


उसकी फ़ितररते खूब जानता हूँ मैं भी,

नया तजरुबा होता है तो हो लेने दे मुझे।


जब भी बात करता है वो अपने जमाल इ हुस्न,

की करता है, है अभी कुछ बाकी कर लेने दे उसे।


वो मसवरा देता है खिदमत करने का और भूल

जाने का हैअभी जरूरत और दे लेने दे उसे।