बाद तेरे कोई न मिला यहाँ

दामन अपना फैला

दुनिया से ,

ले बचा, ले मुझे छिपा

मेरी माँ

सूली काँटों की पीठ पर

उठा सच की

राह कंटीली कितनी

दे उंगली अपनी

मेरी माँ

सच बोलना गुनाह सा हो गया

था जो सच कभी झूठ का

पैरोकार हो गया

बाद तेरे

मेरी माँ

दुनिया का सलीका बदल गया

झूठ रह गया सच था जो

कही खो सा गया

मेरी माँ

झूठ जीने की शर्त हो गया