मणिपुर जल रहा है
फिर कोई घर छोड़ कर भाग रहा है।
शहर बरदाद झुगियां आबाद कर रहा है।
कौन ये आग सुलगा रहा है ?
बहेगा कौन इसमें आँसुओं का शैलाब
आ रहा है ?
नए ज़माने के नए खुदाओं
कौन रोकेगा शैतान जो नाच
रहा है ?
अमन का चोगा पहन कर
कौन चमन उजाड़ रहा है ?
मौन क्यों हो जाता है ?
सिसकियों की आवाज़ में
भगवान् क्या कम सुनता है ?
पत्थर की दीवारों से
बंद क्यों रहती है ?
न्यायालय की नज़रें,
कब देखेगी तबाहीये
उसकी नज़रें ?
बंद है जो किताबों के पन्नो में
समाजो की ये दुनिया मासूम सी
राजनीती की गन्दी चालों
कब बचेगी ?
मणिपुर की दुनिया कितनी बचेगी ?
चीखें, सिसकियों में बदल जाएगी
गोलियां, लाठियां, गलियां छुपा ली
जाएगी,
आग ये मणिपुर से कहाँ तक जाएगी ?
कितनी बस्तिया तबाह की जायेगी ?
मणिपुर के दर्द से कितनी बर्फ
पिघलेगी ?
आग ये कब भुझेगी ?
