इश्क ही तो था और कुछ न था
क्या कहते दिल में और कुछ न था
टटोल कर देखा हर दिल हमने
खुदगर्ज़ी थी बस और कुछ न था
आँखों से कह दिया हाल ए दिल उसने
ज़ुबाँ पे कहने को और कुछ न था
आया जो ओ घर लूटने मेरा
ख़ाली झोंपड़ी थी और कुछ न था
बरबादी थी, भुखमरी थी,
तेरी खुदाई थी, और कुछ न था
