तू खुदा तो नहीं खुदा सा है कोई
दिल की दुनिया में तुझ सा है कोई
ज़माने की नजर मुझ पर रहती है क्यों
जी रहा हूँ जैसे मुजरिम सा है कोई
देखता हूँ आपकी आँखों के असमान में
उड़ता हुआ कोई ख्वाब मुझ सा है कोई
गुज़रा है जो वक्त बैठ कर आपके साथ
बाद मौत के ख्वाब जिंदगी सा है कोई
है पागल जमाना आपकी खूबसूरती का
रूह में आपकी बसता खुदा सा है कोई
