कवि तुम एक काम करना
दिल के एक कोने को खली रखना
फुर्सत मिलें तो खेतों में चले आना
एक कवि से तुम्हें है मिलाना
तपती धुप में धरती के सीने
पर लिखता कविता अपने पसीने से
कुछ खून की बूंदों से भरता रंग फूलों में
रचनाये जिसकी धो जाता बदल पानी से
छंदों अलंकारों से सजाकर कविताये
अपनी तुम्हारी थाली में सजाने को
भेजता
पागल तुम्हारी तरह बिना कीमत लगाए
रचनाएँ अपनी भूख के दीवानों को
बेच जाता ा
खाली कोने में तुम कवि
कुछ शब्द उसकी खातिर
लिखना
दर्द उसे नहीं आता कहना
तुम दर्द उसका दुनिया से कहना
बहुत जरूरी है उसका जीवित रहना
उसका रचते रहना
कवी तुम एक काम करना
दिल के एक कोने को खली रखना
