कहानियाँ सच जानती है
हकीकते सच छुपाती है
आत्माएं जो कहती है
किताबें कहाँ कह पाती है
दिल में दबी कुछ हसरतें
होंठों पे आने से शर्माती है
हकीकत दुनिया की अगर
कह भी दे, कब समझ आती है
दर्द दिल का कलम लिखे दे
पढ़ ले ऑंखें कहाँ मिलती है
आंखे बार बार मिलती है
रूह कितनी बार मिलती है
