बन कर आंसू बहता था कभी आँखों से तूँ
अब सुख गया आँखों में, कहाँ जाता है, आँखों से तूँ
किस से कहूँआँखों से ऐसा क्या कह गया तूँ
है उतर गयागहरा दिल में कह गया आँखों से तूँ
रात भर परिंदा रूह का उड़ता रहा तलाश में
पता कोई अपना जो बता गया था आँखों से तूँ
गुज़रता रहा काफिला जमाने का हर तरफ से
करता रहा दिल की बातें मुझ से आँखों से तूँ
बाद एक मुदत के मिला मुझ से तू आज रात
रहने दे बंद होंठों को कर बातें आँखों से तूँ
