मिलने मिलाने से अब डर लगने लगा है,

हर और एक बाजार सा नज़र आने लगा है।


बातें करना अब छोड़ दिया है मैंने लोगो से,

हर चेहरे पे हाल ए दिल नज़र आने लगा है।

उदास सा है चेहरा एक अरसे से आपका,

दर्द ए दिल आखों में नज़र आने लगा है।


एक आरज़ू थी दिल में, कोई मेरा भी होता,

साया भी अपना साथ छोड़ कर जाने लगा है।


दौर ए मुफलिसी है,कौन बुलाएगा अपने घर मुझे,

हूँ मैं भी इस दुनियां में,अब शक ये भी होने लगा है