खाली जेब,

भरा हुआ बाज़ार,

रंग बिरंगी मिठाइयाँ ,

भिन्न भिन्न आतिशबाजियां,

इंतज़ार करती मुनीयाँ,

छोटी छोटी झोंपड़ियाँ,

उंची ऊँची कोठियां,

लटकती लाईट की लड़ियाँ,

फूटती आतिशबाजियां,

वह घर जाने से डरता है

दिवाली के रोज़ गरीब

जीते जी मरता है

यही किस्सा तब से चलता है

जब से बिन पानी दिया

जलता है

दिवाली के दिन गरीब

का परिवार इंतजार

करता है

दिवाली बीत जाने का