क़र्ज़ से दबे देश के सीने पर,
झूम-झूम कर देशवासियों ने,
आज़ादी का जश्न मनाया।
कुछ अमीरों ने अमीरी में मनाया,
कुछ गरीबों ने गरीबी में मनाया।
देश ने बहुत कोशिश की कर्ज़ को,
मगर किसी तरह भूल न पाया।
जश्न में सबने खूब पैसा बहाया,
और भी कर्ज़ देश पर चढ़ाया।
जश्न देश के कितना काम आया?
मुबारकबाद के शोर में कहीं,
एक कर्ज़दार देश का कर्ज़,
का दर्द किसने महसूस किया ?
