धर्म के ईश्वर, घृणा करते मानवता से,

बुनते नरसंहार के जंजाल निर्दयता से,

धर्म के ईश्वर , प्रतीत होते राजनेता से,

आमजन को बंधाते, डराते निर्दयता से,

धर्म के ईश्वर, करते प्रेम असीम उससे ,

मानता उनकी बात जो तन मन धन से,

धर्म के ईश्वर, अनेक , घृणित अनेकता से,

होता आभास, भरा पड़ा है संसार ईश्वरों से,

धर्म के ईश्वर, कुछ होते है अनजान से,

भरे पड़े है सारे ज्ञान उनके भय भ्रम से,

धर्म के ईश्वर, निष्ठुर भरे पड़े कठोरता से ,

सिखाते द्वेष, घृणा बहुत दूर इश्वार्ता से ,