दया कर, बस दया कर

और कुछ न कर,दया कर


हृदय को अपने द्रवित कर

न ध्यान कर, न दान कर

दुखी ह्रदय को न कभी

नज़र अंदाज़ कर

दया कर, बस दया कर

और कुछ न कर,दया कर


बहते आंसुओं को पोछ कर

दिल की गांठों को खोल कर

ह्रदय को अपने विशाल कर

दया कर, बस दया कर

और कुछ न कर,दया कर


बैठी है रात अँधेरा बिखेर कर

प्रकाश आँखों का बिखेर कर

राह सबकी रोशन कर

दया कर, बस दया कर

और कुछ न कर,दया कर