हाल ए दिल अब क्या पूछें , यंहा हर दिल में दाग है
हवाओं का रुख कहाँ करें , हर दामन में आग है
शौक ए दीदार हर शख्स रखता है आफताब का
वाकिफ कौन है कि महताब के दामन में आग है
फनाह कर दी हर ख़ुशी जिनकी खातिर अपनी
चले गए सब, छोड़ कर अब मेरे दामन में आग है
शमा ए इश्क में उड़ उड़ कर ताउम्र जलते रहे,
राख हुए तो पता चला उसके दामन में आग है
ख्याइश ये थी कि लगा दे आग दुनिया को सारी
जला जनाजा तो पता चला मेरे दामन में आग है
