सरे बाज़ार घुमता है चोर
बनके हीरो रहता है चोर
दिल पढ़ता बातें बनाकर
कभी कभी ठगता है चोर
चोर में नेता खोजते है लोग
क्यों सादगी से डरते है लोग
है गाड़ियाँ चोरी की उसमे
बेफ़िक्र होकर घुमतें है लोग
हर दल में छिपा हुआ चोर
देखता है घुमता हुआ चोर
चोर चोर मौसेरे भाई
भीड़ से मिलता हुआ चोर
