भूख से व्याकुल बच्चे ने

माँ की गोद से चाँद को

निहारते हुए , एक प्रशन

माँ से पूछा बच्चे ने

गोल गोल है चाँद माँ

लाल थोड़ा, पिला मामा

पकती होगी, रोटियां

वहां गोल गोल,

चलो माँ चंदा मामा के घर

आते है भूख मिटाकर

है नहीं कोई यान जो घर

चंदा मामा के जायेगा

भर भर के रोटियां लायेगा

भूख बच्चों की मिटाएगा

बोला बच्चा माँ के आंसू पोछता

कुछ रोटियां तुम खा लेना

कुछ मोहले में बाँट आना

फिर न कबाड़ चुनने

पड़ेगा जाना

माँ माँ माँ

भेजो कोई चंद्रयान

चंदा मामा के घर

आये जो रोटियाँ गोल गोल

लेकर