अब अक्सर सड़क पर
बुलबुलें पड़ी मिलती है
कोई और निशान भी क्या
रफ़्तार ए तरक्की के मिलते है
वो तब था की कुछ बंदर
कटे हुए टायरों से मिलते थे
अबके मिशाल तरक्की की
ये ही है, बुलबुलें पड़ी मिलती है
तरक्की कुछ मधम थी
आदमी की लाशें मिलती थी
अब कुछ रफ़्तार पकड़ी है
बुलबुलें पड़ी मिलती है
