खो गया है मन तेरी माया में वशीभूत हो गया है मन
है कितनी मोहक तेरी कारिगरी इसीमे उलझ गया है मन
है बसेरा तेरा भी तन, है मन अपनी चालबाजी में उलझा
तू ही नीकालेगा, उलझाया है तूने ही अपनी माया में मन
बन गया है अपना ही मालिक अपनी ही आग में जलता मन
मकड़ी सा मन बुनता जाल फिर उसी में उलझा उलझा सा मन
मंदिर है ये तन , आकाश सा भरा उसमे मौन, घर तेरा
बहके नाचे और नचाये, पागल सा बेलगाम अश्व सा मन
