वहा वही करना अब लोगो की आदत हो गई है

हर बात अब हुकुमरान की इबादत हो गई है


मुल्क की बातें गलियों में आम हो गई

फिर भी हालत मुल्क की बरबाद हो गई है


घर अपना बनाने में मशरूफ है हर कोई

नीलाम मुल्क की इमारतें हो गई