जो उनका सब कुछ

मिटा दिया

किसी के लालच के लिए।

निर्दोष, मासूम सी

आँखें जो परोसी जाती हैं

तुम्हारी प्लेट में

मनपसंद भोजन की

चाहत के लिए।

तैर रही हैं पानी पर

स्थिर आसमान की ओर

टकटकी बांधे

पूछती कुछ प्रश्न

भूख मिटाना क्या काफी

न था?

फिर पानी में जहर

क्यों घोला गया?

आदमी का कानून

आदमी का भगवान

हमारे कितना काम आया?