प्यार की  हो रीत प्यार सब के उर में हो, जिंदगी के साज में संगीत प्यार हो। हिन्दू नहीं मुस्लिम नहीं सिक्ख न इसाई, जाती एक प्यार की हो धर्म प्यार हो। झील है ये आँखें इनमे डूबने तो दो, अपनी दिल की बस्ती का पता तो हमको दो। बेचैन हुँ बहोत कि तेरे ख्वाबों में मैं आऊँ, तेरे सपनों में हम आएंगे रजा तो अपनी दो। देखो तो ये कैसा जुल्म कर रहे हैं वो, मेरे दिल के प्यार से मुकर रहे हैं वो। मगरूरियत के हैं खुदा ये देखो हुस्न वाले, देख लिया उनको तो चाँद हो रहें हैं वो।