कविता और कहानी कि कोई शुरवात ना होती
तुम्हारी और मेरी जो यूँ मुलाकात ना होती
नहीं सजती ये महफ़िल फिर नहीं कहता मै ये गजलें
तुम्हारे और मेरे बीच जो दुनिया न ये होती
जरा अहसास दो मुझको कि तुम भी प्यार करती हो
मुझे जो ना देखे तो तुम भी तरसती हो
जरा होठों पे तो आने दो अपने दिल कि बातों को
क्यों मुझको सताती हो क्यों खुद भी तड़पती हो