जवानी प्रेम का उद्भव जवानी जंग की गरिमा
जवानी है बसंती रुत जवानी काम की प्रतिमा
जवानी जिद में आ जाए तो पत्थर भी पिघल जाए
जवानी योग का आसन जवानी सूर्य की उपमा
जवानी है अति चंचल जवानी औषधि दुख की
जवानी में पवन की गति जवानी चाह है सुख की
जवानी ही सदा स्वर्णिम युगों का करती है निर्माण
जवानी आहूति है हर तरह के कर्म के मख की
जवानी है तपा सोना जिसे कुंदन सभी कहते
जवानी है तिलक मां का जिसे चंदन सभी कहते
जवानी सीस दे कर के हमें करती है जब रक्षित
इसे ही तो जवानी का समरपन सभी कहते
