विधा - मुक्तक

ईश्वर प्रार्थना


मेरे स्वामी मेरे कान्हा मेरे गिरधर मेरे गोपाल

तुम्हारी ही कृपा से तो कटे सबके यहां जंजाल

कि इस निर्धन के घर में जो भी है वह सब तुम्हारा है

मेरे सब सुख मेरे सब दुख तुम्हें अर्पित मेरे नंदलाल


सभी के घर में हों उल्लास सभी देश प्रेम समंदर हों

मेरे इस देश में हर रोज उदित मंगल प्रभाकर हों

मेरे भोले धनुर्धर राम करो ये प्रार्थना स्वीकार

प्रवाहित शांति सरिता हों न कहीं दंगों के मंजर हों


अजय राज उपाध्याय ✍️