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हया


आते ही मस्तियों को आदा आ गईमानो जैसे कोई अप्सरा आ गईप्रेम रस में जो श्रंगार उसने कियादेख कर चांद को भी हया आ गई

अजय राज उपाध्याय ✍️

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