वो बेइंतहा खूबसूरत आखें है.
मेरी कब्र पे लिखीं कुछ बातें है.
और तुम बस मांस में लिपटी एक कविता हो.
मेरी यादों से आहों तक का ज़रिया हो.
वो होठ अभ चुप्पियों में सिमत चुके है.
मेरी खिड़की पर कुछ खत फिर बरस चुके है .
अभ ये धड़कने थम भी चुकी है .
और मैं अभ भी हवा में तेरी सासें ढोंड रहा हु.
