जनता से वो दस लोग, पूछ रहे थे नेता से सवाल
की स्कूल, कॉलेज कब बनवाओगे
हमें कब पढ़ाओगे
महंगाई कब घटाओगे
नौकरी कब दिलवाओगे
नेता ने पीछे से एक झोला उठाया
उसपे पावर एंड सपोर्ट का मोहर लगाया
और पटक दिया उसे स्टेज से नीचे
उन में सो दो अब आकर खड़े हो गए नेता के पीछे
जनता से वो आठ लोग, पूछ रहे थे नेता से सवाल
की गरीबी कब घटाओगे
दैनिक मजदूरी कब बढ़वाओगे
अस्पताल कब बनवाओगे
समानता कैसे लाओगे
नेता ने पीछे से फिर एक झोला उठाया
उसपे पुरुष वर्चस्व का मोहर लगाया
और पटक दिया उसे स्टेज से नीचे
उन में से और दो अब आकर खड़े हो गए नेता के पीछे
बचे जनता से वो छ लोग ,अब भी पूछ रहे थे नेता से सवाल
की जल जमीन जंगल कब बचाओगे
न्याय सुनिश्चित कब करवाओगे
भ्रष्टाचार कब हटाओगे
काला धन वापस कैसे लाओगे
नेता ने पीछे से एक और झोला उठाया
उसपे अंधविश्वास का मोहर लगाया
और पटक दिया उसे भी स्टेज से नीचे
उन में से और दो अब आकर खड़े हो गए नेता के पीछे
बचे जनता से वो चार लोग , पूछ रहे थे नेता से सवाल
की आतंकवाद कब मिटाओगे
प्रदूषण से कैसे बचाओगे
साफ पानी कब पिलाओगे
शिक्षा का स्तर कब उठाओगे
नेता ने पीछे से एक झोला उठाया
उसपे सांप्रदायिकता का मोहर लगाया
और पटक दिया उसे स्टेज से नीचे
उन में से और दो अब आकर खड़े हो गए नेता के पीछे
जनता से बचे वो दो लोग, पूछ रहे नेता से सवाल
अर्थव्यवस्था में सुधार कब लाओगे
ये फैला डर कब मिटाओगे
ये देश कब बनाओगे
ये देश कब बचाओगे
नेता ने पीछे से एक झोला उठाया
उसपे देश विरोध का मोहर लगाया
बचे दो लोगों को उस झोले से दबा दिया
और बाकी सभी को, उन दोनो के विरोध में लगा दिया।
अंततः नेता जी ने स्टेज से कुछ बोला
इस पूरे बवाल के बाद अपना मुंह खोला
कहा, देखा आपने खत्म हो गए जनता कर सारे सवाल है
ये हमारी निष्ठा, मेहनत और आपके भरोसे का कमाल है।
और जनता, वो अब जनता नहीं रह गई
वो जनता तो सत्ता के झूठे बहकावे में बह गई
उसके सारे प्रश्न अब कही खो गए हैं
वो सारे सवाल अब विलुप्त हो गए हैं


