विचार गोलियों से नही मरते
आलीशान महल
महल के आगे एक शोर है
चिल्ला रही थी आवाम ये
की महाराजा ही चोर है । (जो जानते है वो जानते हैं)
राजा ने मंत्री से कारण पूछा
बोला मंत्री, इनके कुछ सवाल है
बैठा है राजा कैसे अमन चैन से
जब उसकी प्रजा का हाल बहाल है
सवाल? ऐंठ के राजा ज़ोर से बोला
क्या यह मेरे कदम चूमती भीड़ से नहीं डरते ?
नहीं महाराज, वे तो यह बोल रहे है की
विचार गोलियों से नहीं मरते
वे पूछते है के आप क्यूँ पढ़ाते सच का पाठ
जब खुद ही सच सुन सकते नहीं
हज़ारों सड़क पे रोज़ मर रहे है
पर आपके कान खुद की तारीफ़ से थकते नहीं
चकित हुए महाराज, कि सच पहुँचा कैसे इंतक
मीडिया तो हमारे साँस से बजने वाला शंख है
और जो नहीं बजे, जो ख़्वाब जिए
उनके तो हमने कटवा दिए पंख है
ऐसे भी कमबख़्त है राजन, जो सोचते है ऐसे
इन्होंने कही सी सच कहती किताबें पढ़ी हैं
यह जानते है गांधी, भगत सिंह और आज़ाद ने कैसे
हमारी आज़ादी की पुरज़ोर जंग लड़ी है
ये हमारा प्रॉपगैंडा इतिहास नहीं पढ़ते हैं
नाहीं ये हमारे चमकीले इस्तिहार से फसते हैं
यह तो वो है जो, बेबाक़ हम पर व्यंग करते है
हमसे आँखें मिलाके, हम ही पे तंज़ कसते है
राजन चौक के बोले, ये हमारे विकास में रोड़ा हैं
जल्दी ही इन सबको जेल में बंद कर दो
और जो भी कदम हमारे ख़िलाफ़ में दौड़ा है
उन्हें भी बिना किसी वजह नज़रबंद कर दो
हमारी मीडिया से यह बात पहुँचा दो
अब से राजविरोध ही देशविरोध है
इन क्रांति की भीख माँगने वाले को सज़ा देना ही
देश के हर ग़द्दार के ख़िलाफ़ प्रतिशोध है
ना जाने क्यूँ हमारे चर्चित प्रचार के बीच
यह हर बार खड़े करते बवाल हैं
दबा देना है ऐसी हर वो आवाज़ को
क्यूँकि ये हमारे इमेज का सवाल है
जेल में जाने से पहले, वो नौजवान ज़ोर से बोला
हम क्रांतिकारी जेल की क़ैद से नहीं डरते
एक गिरके अपनी बल से, सौ उठाएगा क्यूँकि
विचार गोलियों से नहीं मरते


