डरो, बार बार डरो, लगातार डरो, हजार बार डरो, हर समय डरते रहो
पर किस्से डरना हैं, क्यों डरना है, ये वो तुम्हे बताएंगे
डर की पाठशाला के सारे पाठ , वही तुम्हे पढ़ाएंगे
डर की प्रतिक्रिया कैसे हो, वो तुम्हे सिखा देंगे
और जो नही करना आया तुम्हे, वो कर के दिखा देंगे
डरो
नहीं तो जो तुम्हारी जी हुजूरी करते हैं वो
तुम्हारे बगल खड़े हो जाएंगे
जो दबे हैं तुम्हारे पांव तले
कल को तुमसे बड़े हो जायेंगे
डरो
क्योंकि ये कल के बच्चे
तुमसे से सवाल कर रहे
पढ़ने लिखने की उम्र है जिनकी
वो देश भर बवाल कर रहे
डरो
हर कोई जो अलग है
उससे तुम्हे डरना है
हर एकता के खयाल को खंडित
तुम्हे ही तो करना है
डरो
सबसे ज्यादा तो उनसे डरो
जो कर रहे भलाई है
ये सारे दंगे, ये सारी फसाद
ये इस भलाई की कमाई है ।
डरो
पर डर का बदला तुम्हे भी
डरा के ही लेना है
हर इंकलाब के खयाल
को मुंह तोड़ जवाब देना हैं
डरो
तुम्हे अपने डर को
गुस्से में बदल लेना हैं
और इस गुस्से की आग में हर
बेकौफ को झोंक देना
डरो
क्योंकि अगर नही डरोगे तो
ये खुद तुम्हे डराएंगे
सत्ता के यंत्रों से
खुद तुम्हे सताएंगे
तुम्हारी हर आवाज़ को मोहरा ये बना लेंगे
और फिर उससे डरने वालों को
पहले से और ज्यादा डराएंगे
दबा देंगे तुम्हारी हर संवेदना पर लगी चोट
से निकले लफ्ज़ को
और फिर इन डरे हुए लोगों को
तुम्हारे पीछे लगाएंगे
डरो
पर इस डर से लाभ किसका ये जरूर
तुम सोच लेना
तुम्हारे डर से जीत किसकी ये जरूर
तुम खोज लेना
और जो न खोज पाए तो एक विकल्प तो
बाकी हैं , की
डरो, बार बार डरो, लगातार डरो, हजार बार डरो, हर समय डरते रहो, बस डरते रहो, बस डरते रहो


