कैद कर रखा हूं खुद कोखुद के ही कैदखाने में,वैसे भी अब खुली हवा मेंपहले वाली खुशबू कहां रही।
कैद कर रखा हूं खुद कोखुद के ही कैदखाने में,
वैसे भी अब खुली हवा मेंपहले वाली खुशबू कहां रही।