ज़रा सी आँख क्या लगी,
ज़िन्दगी छम से सामने आ गयी |
फिर थोडा मुस्कुराई और कहा,
तुम मेरे साथ चोलेगे ?
मैं ठहरा हैरान, फिर सोचने लग गया,
मैंने पूछा, तो क्या तुम सुच-मुच बन सकती हो मेरी ?
न जाने क्यूँ पर थोड़ी सहमी हुई थी,
डर से लेकिन उसने हाँ कह दी |
इससे पहले कि उसको बाँहों में भर पाता,
तभी मेरी मजबूरी सामने थी, और मेरी नींद खुल गयी |
