ज़िंदगी मुझे वो मनचाहा मुकाम दे,

यारों के साथ एक हसीं सकूं भरी शाम दे,

कुछ खुबसूरत मोहबत के लम्हें भी मेरे नाम दे,

गर गुनेहगार हूं तेरा तो सजा-- अंजाम दे,

हुनर दिखे इन तराशे अल्फाजो में मेरे, तो मुझे इनायत ईनाम दे,

 

बस अब और ना आजमा मेरे सबर को,

 बस एक महफ़िल मेरे नाम दे,

ज़िंदगी मुझे मेरा मनचाहा मुकाम दे!

  @deeptidilsediltak