प्रिय !  तुम तक कैसे मैं आती's image
720K

प्रिय ! तुम तक कैसे मैं आती

सांसो के अक्षय

बंधन में

बोझिल  सांसें

आती जाती

पग -पग चलती

 राह न पाती

अनजाने पथ  में

खो जाती ।

प्रिय !  तुम तक कैसे मैं आती

सिसक -सिसक कर

मेरी पीड़ा

जब -जब अपनी

करुणा गाती

अपनी सुधि से

आधी -अधूरी

धूमिल सी

सुछवि बनाती

अविरल बहते

मेरे अश्रु

इक पल में ही

सब धो जाते ।

Read More! Earn More! Learn More!